सितम्बर 2025 में नेतन्याहू न्यू यॉर्क में जब प्रो-इजरायल इनफ्लुएंसर्स के एक समूह से मिले थे तब वह मात्र एक फोटो ऑप नहीं था। 5 महीने बाद जब ईरान पर बम गिर रहे थे, तब यही इनफ्लुएंसर्स आपकी फीड और आपकी स्टोरीज, हर जगह आपके विचार, कि आप इस युद्ध के बारे में क्या जानते थे, का निर्माण कर रहे थे। ईरान युद्ध के दौरान इजरायल समर्थक इनफ्लुएंसर्स ने कैसे ऑनलाइन नैरेटिव का निर्माण किया, यह रिपोर्ट इसकी पड़ताल करती है।
17 मार्च को ईरान पर इज़राइल – अमेरिकी युद्ध अपने 18वें दिन में पहुंच गया। 28 फरवरी को अचानक हुए हवाई हमले से यह टकराव उपजा और अभी तक देशों के बीच कई हवाई हमलों का गवाह बन चुका है, जो अभी भी जारी हैं। इस युद्ध ने, जिसके रणनीतिक केंद्र में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज है, न सिर्फ आधारभूत संरचनाओं को क्षति पहुंचाई है बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भी पंगु कर दिया है।
विशेष रूप से ईरान युद्ध में, बहुत बड़ी मात्रा में झूठे नैरेटिव और अमेरिका – इजरायल के ईरान पर हमले का औचित्य सिद्ध करने वाला प्रोपेगेंडा, सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हुआ है।
इन इनफ्लुएंसर्स की ऑनलाइन लामबंदी को समझने के लिए पीछे जाकर इनकी शुरुआती मुलाकात और समन्वय पर नजर डालना जरूरी है। इस रिपोर्ट की समयावधि सितंबर 2025 से शुरू होती है, जब इज़रायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका में इज़राइल समर्थक इनफ्लुएंसर्स से मिलते हैं। आगे ईरान युद्ध तक बढ़ते हैं, और हम देखेंगे कि कैसे इन इनफ्लुएंसर्स ने इज़रायल समर्थक पक्ष लिया, सोशल मीडिया पर ईरान के खिलाफ भावनाएं भड़काई, और एक ऐसे युद्ध को जायज़ ठहराया जिसने कई निर्दोष जानें ले ली।
बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मुलाकात
सितंबर 26, 2025 को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने न्यू यॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र के हेडक्वार्टर में संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली को संबोधित करते हुए उन देशों की निंदा की जो फिलिस्तीन को एक राज्य के रूप में मान्यता देते हैं। उन्होंने फिलिस्तीनी राज्य की तुलना उस परिदृश्य से की जिसमें 9/11 के हमलों के बाद न्यू यॉर्क से एक मील दूर अल-कायदा को एक राज्य दे दिया जाए। उनकी स्पीच को संयुक्त राष्ट्र के हालिया इतिहास के सबसे बड़े वॉकआउट का सामना करना पड़ा।
26 सितंबर 2025 को ही बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका के न्यू यॉर्क शहर के इज़रायली वाणिज्य दूतावास में प्रो इजरायल इनफ्लुएंसर्स से मिले।
इस मुलाक़ात के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि “वोक राइट” और “वोक लेफ्ट” दोनों ही कुछ एनजीओ और दूसरी सरकारों से आर्थिक मदद लेकर अमेरिका में इज़राइली समर्थन के आधार को व्यवस्थित तौर पर निशाना बना रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका में इज़राइली समर्थन को बचाने पर जोर देने की आवश्यकता है और प्रो इजरायल इनफ्लुएंसर्स इसमें एक प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
न्यूयॉर्क स्थित इजरायल के वाणिज्य दूतावास की प्रेस विज्ञप्ति में लिखा है: “प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू – संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली की अपनी स्पीच के बाद न्यू यॉर्क स्थित इजरायल के वाणिज्य दूतावास में – प्रो इजरायल अमेरिकी इनफ्लुएंसर्स से मिले और नए दौर की चुनौतियों पर उनसे बात के साथ-साथ जन कूटनीतिक प्रयासों और सोशल नेटवर्क्स पर इजरायल के पक्ष और विरुद्ध होने वाले डिस्कोर्स के प्रभावों पर बातचीत की।”
कौन थे ये इनफ्लुएंसर्स?
सितंबर 28, 2025 को इज़राइल के प्रधान मंत्री कार्यालय के आधिकारिक एक्स अकाउंट से एक ग्रुप फोटो साझा की गई जिसमें बेंजामिन नेतन्याहू उन इनफ्लुएंसर्स के साथ थे जिनसे वे न्यू यॉर्क के इज़राइली वाणिज्य दूतावास पर मिले थे।
28 सितंबर को एक्स पर साझा की गई तस्वीर
हमने इस फोटो की जांच की और पाया कि उन प्रमुख इनफ्लुएंसर्स, जो बेंजामिन नेतन्याहू से मिले थे, के नाम निम्नलिखित हैं:
लिज़्जी सावेतस्की, एमिली ऑस्टिन, ज़ैक सेज फॉक्स , बेन सॉफर, हाना फॉकनर, नोआ कोकवा, डेबरा लिया, शे ज़ाबो
इन इनफ्लुएंसर्स की सोशल मीडिया सामग्री का विश्लेषण उन समान नैरेटिव को उजागर करती है जिनके इर्द गिर्द ये अपना कंटेंट बनाते हैं। ये नैरेटिव इस निम्नलिखित हैं:
- गाज़ा में नरसंहार के आरोपों को नकारना
- गाज़ा में कुपोषण और मानवीय संकट की रिपोर्टों को खारिज करना
- फिलिस्तीनी कष्ट को ऐसे प्रस्तुत करना जैसे उसे बड़ा चढ़ाकर दिखाया जा रहा हो
- फिलिस्तीनी पत्रकारों पर आतंकवाद से जुड़े होने के आरोप मढ़ना
- फिलिस्तीनी समर्थकों को अनैतिक और सहानुभूति के अयोग्य पेश करना
- इजरायल द्वारा आत्मरक्षा में कार्यवाही के घोषित और अघोषित नैरेटिव
- फिलिस्तीन को राज्य के दर्जे के विरोध को फिलीस्तीनियों के भविष्य की चिंता बताना
इन इनफ्लुएंसर्स ने ईरान पर हुए इज़राइल – अमेरिकी हमले पर क्या प्रतिक्रिया दी?
हमले को पवित्र युद्ध के रूप में पेश करना
2026 में दुनियाभर के यहूदियों ने 2 मार्च के सूर्यास्त से लेकर 3 मार्च की सांझ तक पुरिम पर्व मनाया। ईरान पर हमले के कुछ देर बाद ही इनफ्लुएंसर्स, एमिली ऑस्टिन और लिज़्जी सवेत्सकी ने सोशल मीडिया पर इस हमले और एस्थर की किताब में हुए पुरिम पर्व के जिक्र के बीच समानताएं गिनाई।
2 मार्च को एमिली ऑस्टिन ने एक्स पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने कहा “क्या यह आश्चर्यजनक नहीं कि समय का पहिया वापस घूमकर वहीं लौटता है? सभी दिनों को छोड़, अभी पुरिम के समय यहूदी, फारसियों को दशकों के अत्याचार से मुक्त कराने में भूमिका अदा कर रहे हैं। यह वही त्योहार है जो रानी एस्थर और फारसियों द्वारा यहूदियों को विनाश से बचाने के लिए 2500 साल पहले आगे आने की याद दिलाता है। कामना है कि शक्ति सच्ची शांति लाए, और उस शांति से सभी सम्बन्धित जन को समृद्धि और स्वतंत्रता प्राप्त हो। उस दिन के लिए प्रार्थना करती हूं।”

इसी तरह, एक दक्षिणपंथी मीडिया संस्थान न्यूज़मैक्स के साथ टेलीविजन इंटरव्यू में, लिज़्जी सवेत्सकी ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खमेनेई की तुलना एस्थर की किताब के मुख्य खलनायक हमान से करती हैं। उस इंटरव्यू की एक क्लिप उन्होंने 4 मार्च को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा की। इस पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा “ईरान युद्ध और यहूदी त्योहार पुरिम के बीच अलौकिक समानता है। यह हमेशा से यहूदियों की कहानी रही है। और जैसा हम देख सकते हैं, हमारा विनाश चाहने वाले हमारे दुश्मन का खात्मा, विश्व के ठीक उसी स्थान पर 2200 साल पूर्व और आज, ईश्वर की ही मर्जी है।”

17 मार्च तक इस पोस्ट को 3000 लाइक मिल चुके हैं।
अली खमेनेई की मृत्यु और इस हमले का विरोध करने वाले लोगों पर इनकी क्या प्रतिक्रिया रही?
अली खमेनेई की हत्या के बाद, तेहरान और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से ईरानी लोगों द्वारा जश्न मनाने की खबरें आई। बहुत से लोगों ने ईरान की संप्रभुता का हनन और उसके सर्वोच्च नेता की हत्या करने वाली इज़राइल-अमेरिकी कार्यवाही की निंदा की।
28 फरवरी को, इन्फ्लूएंसर डेबरा लिया ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से अली खमेनेई की मौत के बाद तेहरान में लोगों द्वारा जश्न की न्यू यॉर्क में युद्ध के विरोध से तुलना करती एक वीडियो साझा की।

इस वीडियो में वे कहती हैं, “यह इतिहास में पहली बार हुआ जब एक देश जिसपर बमबारी हो रही है वहां के लोग जश्न मना रहे हैं और जो देश ये बमबारी कर रहा है वहाँ लोग इसका विरोध कर रहे हैं।” वीडियो के अंत में वे उदारवाद को “दिमागी सड़ांध” करार देती हैं।
हमले का समर्थन करते हुए, एक यूज़र ने टिप्पणी की, “याद रखिए! अगर कोई दिन दुनिया के लिए अच्छा है तो वह दिन अमेरिकी वामपंथियों के लिए बुरा होगा।” एक अन्य यूजर ने कहा, “बिल्कुल, वे ईरानी हैं भी नहीं। वे ईरान के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। हम लोग खुश हैं।”
उन महिलाओं की आलोचना करते हुए जिन्होंने ईरान पर हमले की निंदा की थी, 3 मार्च को इज़रायली मॉडल, नोआ कोक्वा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, “उन सभी छद्म नारीवादियों के लिए, और खूबसूरत और साहसी ईरानी महिलाओं के लिए, आजादी ♥️।” वीडियो में उन्होंने लिखा, “30 इज़रायली लड़ाकू महिला पायलट आज आसमान में हैं, ईरान पर धावा बोलने और उस सत्ता से लड़ने के लिए जो औरतों को अपने केश दिखाने के लिए मार देता है!!!”

17 मार्च तक, इस पोस्ट को 8,300 से ज्यादा लाइक्स मिल चुके थे।
इस पोस्ट का जवाब देते हुए एक यूज़र ने कहा, “यह प्रोपेगेंडा है” वहीं एक अन्य यूजर ने सवाल किया, “क्या आप उन सौ से अधिक स्कूली लड़कियों की आजादी की बात कर रही हैं जिनपर इजरायल ने बमबारी की?”
3 मार्च को, प्रो-इजरायल एक्टिविस्ट सेज फॉक्स ने अली खमेनेई का मजाक उड़ाने वाला एक एआई जनित म्यूजिकल साझा किया। इसमें लोग उनकी मृत्यु का जश्न मनाते दिखाए गए हैं।

17 मार्च तक इस पोस्ट को 4200 लाइक्स मिल चुके थे।
इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूज़र ने टिप्पणी की, “आप एक बाल यौन शोषण करने वाले युद्ध भड़काने वाले और उसके नरसंहारकारी सहयोगी का समर्थन करते हैं।” एक अन्य यूज़र ने लिखा, “लेकिन एक नए अयातुल्लाह आ रहे हैं, और तुम्हारे सैन्य आधार तबाह किए जा रहे हैं।”
ईरान में लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले का बचाव इन्फ्लुएंसर्स ने कैसे किया?
28 फरवरी को ईरान के विभिन्न हिस्सों में हुए अमेरिकी-इजराइल संयुक्त हवाई हमलों के दौरान, ईरान के मीनाब में एक लड़कियों के प्राथमिक विद्यालय पर भी मिसाइल से हमला हुआ। इस हमले में 170 लोग मारे गए, जिनमें से अधिकांश स्कूली छात्राएं थीं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस हमले की व्यापक रूप से निंदा की, लेकिन कई ऑनलाइन इन्फ्लुएंसर्स ने इसे जायज ठहराने की कोशिश की।
1 मार्च को लिज़्जी सवेत्सकी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो साझा करती है जिसमें वह आरोप लगाती है कि स्कूल में हुआ हमला इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का ही मास्टर प्लान था। वीडियो का कैप्शन था, “इसे वापस लिए जाने और इसमें सुधार का इंतजार कर रही हूं। हम आपको और आपकी झूठी सहानुभूति को समझते हैं।”
फिर वह आईआरजीसी की तुलना हमास से करती है, ये इशारा करते हुए कि हमास भी यही करता है क्योंकि उसे ईरान से प्रशिक्षण मिला है और ये बताती है कि जो सहानुभूति दुनिया इस हमले पर महसूस कर रही है वह केवल एक नाटक है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि हालिया हमलों के बाद ईरानी लोगों के जीवन के प्रति चिंता जताने वाले लोग केवल यहूदियों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
बिल्कुल इसी तरह, इन्फ्लूएंसर शे ज़ाबो 3 मार्च को एक वीडियो साझा करती है जिसका कैप्शन था, “प्रोपेगेंडा की लड़ाई आतंकवादी पहली हेडलाइन पर नियंत्रण रख कर जीतते हैं। हम सभी ने यह गाज़ा में होते देखा। ईरान के मामले दोबारा उसी चाल के झांसे में न आएं।”

वीडियो में शे ज़ाबो कहती है, “2026 में प्रोपेगेंडा ऐसे काम करता है। हमास या ईरानी सत्ता भी, जानबूझकर किसी स्कूल, किसी अस्पताल, या फिर किसी रिहायशी इमारत से कार्यवाही करते हैं और फिर वे उस कार्यवाही पर प्रतिक्रिया का इंतजार करते हैं जो उन्होंने खुद उकसाई होती है। या उनका निशाना चूकता है और वे खुद इन इन्हें अपना निशाना बनाते हैं। फिर वे तबाह किए ढांचों की तस्वीरों का प्रसारण करते हैं और इसके पीछे का सैन्य संदर्भ गोल कर देते हैं। और इस तरह गुस्सा तथ्यों से जल्दी फैलता है।” इस प्रकार वह यह सुझाव देती है कि आईआरजीसी ने सहानुभूति के लिए इस हमले की साजिश थी।
11 मार्च की गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार घटना की प्रारंभिक अमेरिकी सैन्य जांच से पता चला है कि मीनाब के प्राथमिक विद्यालय पर हुए घातक हमले के लिए अमेरिका जिम्मेदार था।
यह विश्लेषण ये उजागर करता है कि इन्फ्लूएंसर्स, जो इज़रायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सितंबर 2025 में मिले थे, कैसे अपने ऑनलाइन मंचों से ईरान युद्ध पर लोक-मत तैयार कर रहे थे।
(18 मार्च को प्रकाशित सुजीत ए की रिपोर्ट ऑफबीट कंसर्न्स से साभार। अनुवाद : शुभम रौतेला। मूल अंग्रेज़ी रिपोर्ट यहाँ पढ़ सकते हैं।)